महाभारत 12.78.10
नानाप्तदक्षिणैर्यज्ञैर्यजन्ते विषये ममअधीते नाव्रती कश्चिन्मामकान्तरमाविशः
nānāptadakṣiṇairyajñairyajante viṣaye mamaadhīte nāvratī kaścinmāmakāntaramāviśaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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