महाभारत 12.78.3
विकर्मस्थाश्च नोपेक्ष्या विप्रा राज्ञा कथंचनइति राज्ञां पुरावृत्तमभिजल्पन्ति साधवः
vikarmasthāśca nopekṣyā viprā rājñā kathaṃcanaiti rājñāṃ purāvṛttamabhijalpanti sādhavaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें