महाभारत 12.82.16
कृतमूलमिदानीं तज्जातशब्दं सहायवत्न शक्यं पुनरादातुं वान्तमन्नमिव त्वया
kṛtamūlamidānīṃ tajjātaśabdaṃ sahāyavatna śakyaṃ punarādātuṃ vāntamannamiva tvayā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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