महाभारत 12.82.19
अनायसेन शस्त्रेण मृदुना हृदयच्छिदाजिह्वामुद्धर सर्वेषां परिमृज्यानुमृज्य च
anāyasena śastreṇa mṛdunā hṛdayacchidājihvāmuddhara sarveṣāṃ parimṛjyānumṛjya ca
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें