महाभारत 12.82.21
नारद उवाच · nārada uvāca
शक्त्यान्नदानं सततं तितिक्षा दम आर्जवम्यथार्हप्रतिपूजा च शस्त्रमेतदनायसम्
śaktyānnadānaṃ satataṃ titikṣā dama ārjavamyathārhapratipūjā ca śastrametadanāyasam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें