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महाभारत 12.82.25
भेदाद्विनाशः संघानां संघमुख्योऽसि केशवयथा त्वां प्राप्य नोत्सीदेदयं संघस्तथा कुरु
bhedādvināśaḥ saṃghānāṃ saṃghamukhyo'si keśavayathā tvāṃ prāpya notsīdedayaṃ saṃghastathā kuru
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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