महाभारत 12.9.34
दिवः पतत्सु देवेषु स्थानेभ्यश्च महर्षिषुको हि नाम भवेनार्थी भवेत्कारणतत्त्ववित्
divaḥ patatsu deveṣu sthānebhyaśca maharṣiṣuko hi nāma bhavenārthī bhavetkāraṇatattvavit
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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