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महाभारत 12.9.3
क्षेम्यश्चैकाकिना गम्यः पन्थाः कोऽस्तीति पृच्छ माम्अथ वा नेच्छसि प्रष्टुमपृच्छन्नपि मे शृणु
kṣemyaścaikākinā gamyaḥ panthāḥ ko'stīti pṛccha māmatha vā necchasi praṣṭumapṛcchannapi me śṛṇu
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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