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महाभारत 12.92.3
एवमेव द्विजेन्द्राणां क्षत्रियाणां विशामपिशूद्राश्चतुर्णां वर्णानां नानाकर्मस्ववस्थिताः
evameva dvijendrāṇāṃ kṣatriyāṇāṃ viśāmapiśūdrāścaturṇāṃ varṇānāṃ nānākarmasvavasthitāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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