महाभारत 12.92.47
ततस्त्वं सर्वभूतानां धर्मं वेत्स्यसि वै परम्स्वदेशे परदेशे वा न ते धर्मो विनश्यति
tatastvaṃ sarvabhūtānāṃ dharmaṃ vetsyasi vai paramsvadeśe paradeśe vā na te dharmo vinaśyati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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