महाभारत 12.92.7
चातुर्वर्ण्यं तथा वेदाश्चातुराश्रम्यमेव चसर्वं प्रमुह्यते ह्येतद्यदा राजा प्रमाद्यति
cāturvarṇyaṃ tathā vedāścāturāśramyameva casarvaṃ pramuhyate hyetadyadā rājā pramādyati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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