महाभारत 13.13.1
युधिष्ठिर उवाच · yudhiṣṭhira uvāca
किं कर्तव्यं मनुष्येण लोकयात्राहितार्थिनाकथं वै लोकयात्रां तु किंशीलश्च समाचरेत्
kiṃ kartavyaṃ manuṣyeṇa lokayātrāhitārthinākathaṃ vai lokayātrāṃ tu kiṃśīlaśca samācaret
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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