महाभारत 13.34.16
भृगवोऽजयंस्तालजङ्घान्नीपानङ्गिरसोऽजयन्भरद्वाजो वैतहव्यानैलांश्च भरतर्षभ
bhṛgavo'jayaṃstālajaṅghānnīpānaṅgiraso'jayanbharadvājo vaitahavyānailāṃśca bharatarṣabha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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