महाभारत 13.51.39
प्रतिगृह्णामि वो धेनुं कैवर्ता मुक्तकिल्बिषाःदिवं गच्छत वै क्षिप्रं मत्स्यैर्जालोद्धृतैः सह
pratigṛhṇāmi vo dhenuṃ kaivartā muktakilbiṣāḥdivaṃ gacchata vai kṣipraṃ matsyairjāloddhṛtaiḥ saha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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