महाभारत 13.51.3
अर्चयामास तं चापि तस्य राज्ञः पुरोहितःसत्यव्रतं महाभागं देवकल्पं विशां पते
arcayāmāsa taṃ cāpi tasya rājñaḥ purohitaḥsatyavrataṃ mahābhāgaṃ devakalpaṃ viśāṃ pate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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