महाभारत 13.51.4
नहुष उवाच · nahuṣa uvāca
करवाणि प्रियं किं ते तन्मे व्याख्यातुमर्हसिसर्वं कर्तास्मि भगवन्यद्यपि स्यात्सुदुष्करम्
karavāṇi priyaṃ kiṃ te tanme vyākhyātumarhasisarvaṃ kartāsmi bhagavanyadyapi syātsuduṣkaram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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