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महाभारत 13.68.2
पृथिवीं क्षत्रियो दद्याद्ब्राह्मणस्तां स्वकर्मणाविधिवत्प्रतिगृह्णीयान्न त्वन्यो दातुमर्हति
pṛthivīṃ kṣatriyo dadyādbrāhmaṇastāṃ svakarmaṇāvidhivatpratigṛhṇīyānna tvanyo dātumarhati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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