महाभारत 13.68.9
प्रचारे वा निपाने वा बुधो नोद्वेजयेत गाःतृषिता ह्यभिवीक्षन्त्यो नरं हन्युः सबान्धवम्
pracāre vā nipāne vā budho nodvejayeta gāḥtṛṣitā hyabhivīkṣantyo naraṃ hanyuḥ sabāndhavam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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