महाभारत 13.71.5
भीष्म उवाच · bhīṣma uvāca
अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्यथापृच्छत्पद्मयोनिमेतदेव शतक्रतुः
atrāpyudāharantīmamitihāsaṃ purātanamyathāpṛcchatpadmayonimetadeva śatakratuḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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