महाभारत 13.71.7
कीदृशा भगवँल्लोका गवां तद्ब्रूहि मेऽनघयानावसन्ति दातार एतदिच्छामि वेदितुम्
kīdṛśā bhagavam̐llokā gavāṃ tadbrūhi me'naghayānāvasanti dātāra etadicchāmi veditum
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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