महाभारत 13.73.5
ये दोषा यादृशाश्चैव द्विजयज्ञोपघातकेविक्रये चापहारे च ते दोषा वै स्मृताः प्रभो
ye doṣā yādṛśāścaiva dvijayajñopaghātakevikraye cāpahāre ca te doṣā vai smṛtāḥ prabho
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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