महाभारत 13.78.14
अपां फेनसवर्णां तु सवत्सां कांस्यदोहनाम्प्रदाय वस्त्रसंवीतां वारुणं लोकमश्नुते
apāṃ phenasavarṇāṃ tu savatsāṃ kāṃsyadohanāmpradāya vastrasaṃvītāṃ vāruṇaṃ lokamaśnute
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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