महाभारत 13.78.17
पलालधूम्रवर्णां तु सवत्सां कांस्यदोहनाम्प्रदाय वस्त्रसंवीतां पितृलोके महीयते
palāladhūmravarṇāṃ tu savatsāṃ kāṃsyadohanāmpradāya vastrasaṃvītāṃ pitṛloke mahīyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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