महाभारत 13.78.24गोप्रदानरतो याति भित्त्वा जलदसंचयान्विमानेनार्कवर्णेन दिवि राजन्विराजताgopradānarato yāti bhittvā jaladasaṃcayānvimānenārkavarṇena divi rājanvirājatāइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें