महाभारत 13.78.25
तं चारुवेषाः सुश्रोण्यः सहस्रं वरयोषितःरमयन्ति नरश्रेष्ठ गोप्रदानरतं नरम्
taṃ cāruveṣāḥ suśroṇyaḥ sahasraṃ varayoṣitaḥramayanti naraśreṣṭha gopradānarataṃ naram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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