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महाभारत 13.78.27
यावन्ति लोमानि भवन्ति धेन्वा;स्तावन्ति वर्षाणि महीयते सःस्वर्गाच्च्युतश्चापि ततो नृलोके; कुले समुत्पत्स्यति गोमिनां सः
yāvanti lomāni bhavanti dhenvā;stāvanti varṣāṇi mahīyate saḥsvargāccyutaścāpi tato nṛloke; kule samutpatsyati gomināṃ saḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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