महाभारत 13.78.2
लोकेऽस्मिन्दक्षिणानां च सर्वासां वयमुत्तमाःभवेम न च लिप्येम दोषेणेति परंतप
loke'smindakṣiṇānāṃ ca sarvāsāṃ vayamuttamāḥbhavema na ca lipyema doṣeṇeti paraṃtapa
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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