महाभारत 13.78.4
तथा सर्वाणि भूतानि स्थावराणि चराणि चप्रदातारश्च गोलोकान्गच्छेयुरिति मानद
tathā sarvāṇi bhūtāni sthāvarāṇi carāṇi capradātāraśca golokāngaccheyuriti mānada
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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