महाभारत 13.78.8
समानवत्सां कपिलां धेनुं दत्त्वा पयस्विनीम्सुव्रतां वस्त्रसंवीतां ब्रह्मलोके महीयते
samānavatsāṃ kapilāṃ dhenuṃ dattvā payasvinīmsuvratāṃ vastrasaṃvītāṃ brahmaloke mahīyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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