Loading
महाभारत 13.78.9
रोहिणीं तुल्यवत्सां तु धेनुं दत्त्वा पयस्विनीम्सुव्रतां वस्त्रसंवीतां सूर्यलोके महीयते
rohiṇīṃ tulyavatsāṃ tu dhenuṃ dattvā payasvinīmsuvratāṃ vastrasaṃvītāṃ sūryaloke mahīyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें