महाभारत 13.80.25
सौवर्णगिरयस्तत्र मणिरत्नशिलोच्चयाःसर्वरत्नमयैर्भान्ति शृङ्गैश्चारुभिरुच्छ्रितैः
sauvarṇagirayastatra maṇiratnaśiloccayāḥsarvaratnamayairbhānti śṛṅgaiścārubhirucchritaiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें