महाभारत 13.80.27
रमन्ते पुण्यकर्माणस्तत्र नित्यं युधिष्ठिरसर्वकामसमृद्धार्था निःशोका गतमन्यवः
ramante puṇyakarmāṇastatra nityaṃ yudhiṣṭhirasarvakāmasamṛddhārthā niḥśokā gatamanyavaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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