महाभारत 14.41.2
अहंकारश्च भूतादिर्वैकारिक इति स्मृतःतेजसश्चेतना धातुः प्रजासर्गः प्रजापतिः
ahaṃkāraśca bhūtādirvaikārika iti smṛtaḥtejasaścetanā dhātuḥ prajāsargaḥ prajāpatiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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