महाभारत 14.52.9
स पृष्टः कुशलं तेन संपूज्य मधुसूदनम्उत्तङ्को ब्राह्मणश्रेष्ठस्ततः पप्रच्छ माधवम्
sa pṛṣṭaḥ kuśalaṃ tena saṃpūjya madhusūdanamuttaṅko brāhmaṇaśreṣṭhastataḥ papraccha mādhavam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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