महाभारत 14.64.1
ब्राह्मणा ऊचुःक्रियतामुपहारोऽद्य त्र्यम्बकस्य महात्मनःकृत्वोपहारं नृपते ततः स्वार्थे यतामहे
brāhmaṇā ūcuḥkriyatāmupahāro'dya tryambakasya mahātmanaḥkṛtvopahāraṃ nṛpate tataḥ svārthe yatāmahe
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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