महाभारत 14.64.18
एतेष्वाधाय तद्द्रव्यं पुनरभ्यर्च्य पाण्डवःमहादेवं प्रति ययौ पुरं नागाह्वयं प्रति
eteṣvādhāya taddravyaṃ punarabhyarcya pāṇḍavaḥmahādevaṃ prati yayau puraṃ nāgāhvayaṃ prati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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