महाभारत 14.64.19
द्वैपायनाभ्यनुज्ञातः पुरस्कृत्य पुरोहितम्गोयुते गोयुते चैव न्यवसत्पुरुषर्षभः
dvaipāyanābhyanujñātaḥ puraskṛtya purohitamgoyute goyute caiva nyavasatpuruṣarṣabhaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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