महाभारत 14.64.8
कृत्वा तु पूजां रुद्रस्य गणानां चैव सर्वशःययौ व्यासं पुरस्कृत्य नृपो रत्ननिधिं प्रति
kṛtvā tu pūjāṃ rudrasya gaṇānāṃ caiva sarvaśaḥyayau vyāsaṃ puraskṛtya nṛpo ratnanidhiṃ prati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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