महाभारत 14.74.16
ततोऽर्जुनस्तूर्णतरं रुक्मपुङ्खानजिह्मगान्प्रेषयामास संक्रुद्धो भगदत्तात्मजं प्रति
tato'rjunastūrṇataraṃ rukmapuṅkhānajihmagānpreṣayāmāsa saṃkruddho bhagadattātmajaṃ prati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें