महाभारत 14.87.11विननादासकृत्सोऽथ दिवसे दिवसे तदाएवं स ववृते यज्ञो धर्मराजस्य धीमतःvinanādāsakṛtso'tha divase divase tadāevaṃ sa vavṛte yajño dharmarājasya dhīmataḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें