महाभारत 14.87.12
अन्नस्य बहवो राजन्नुत्सर्गाः पर्वतोपमाःदधिकुल्याश्च ददृशुः सर्पिषश्च ह्रदाञ्जनाः
annasya bahavo rājannutsargāḥ parvatopamāḥdadhikulyāśca dadṛśuḥ sarpiṣaśca hradāñjanāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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