महाभारत 14.87.2
ददृशुस्तं नृपतयो यज्ञस्य विधिमुत्तमम्देवेन्द्रस्येव विहितं भीमेन कुरुनन्दन
dadṛśustaṃ nṛpatayo yajñasya vidhimuttamamdevendrasyeva vihitaṃ bhīmena kurunandana
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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