महाभारत 14.95.5
पुरागस्त्यो महातेजा दीक्षां द्वादशवार्षिकीम्प्रविवेश महाराज सर्वभूतहिते रतः
purāgastyo mahātejā dīkṣāṃ dvādaśavārṣikīmpraviveśa mahārāja sarvabhūtahite rataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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