महाभारत 14.96.3
श्राद्धं संकल्पयामास जमदग्निः पुरा किलहोमधेनुस्तमागाच्च स्वयं चापि दुदोह ताम्
śrāddhaṃ saṃkalpayāmāsa jamadagniḥ purā kilahomadhenustamāgācca svayaṃ cāpi dudoha tām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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