महाभारत 14.96.7
जितोऽस्मीति भृगुश्रेष्ठ भृगवो ह्यतिरोषणाःलोके मिथ्याप्रवादोऽयं यत्त्वयास्मि पराजितः
jito'smīti bhṛguśreṣṭha bhṛgavo hyatiroṣaṇāḥloke mithyāpravādo'yaṃ yattvayāsmi parājitaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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