महाभारत 15.19.5
भीमस्तु सर्वदुःखानि संस्मृत्य बहुलान्युतकृच्छ्रादिव महाबाहुरनुमन्ये विनिःश्वसन्
bhīmastu sarvaduḥkhāni saṃsmṛtya bahulānyutakṛcchrādiva mahābāhuranumanye viniḥśvasan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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