महाभारत 15.29.15
कदा द्रक्ष्यामि तां देवीं यदि जीवति सा पृथाजीवन्त्या ह्यद्य नः प्रीतिर्भविष्यति नराधिप
kadā drakṣyāmi tāṃ devīṃ yadi jīvati sā pṛthājīvantyā hyadya naḥ prītirbhaviṣyati narādhipa
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें