महाभारत 15.29.4
ते स्म वीरा दुराधर्षा गाम्भीर्ये सागरोपमाःशोकोपहतविज्ञाना नष्टसंज्ञा इवाभवन्
te sma vīrā durādharṣā gāmbhīrye sāgaropamāḥśokopahatavijñānā naṣṭasaṃjñā ivābhavan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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