महाभारत 15.40.6
ततः सुतुमुलः शब्दो जलान्तर्जनमेजयप्रादुरासीद्यथा पूर्वं कुरुपाण्डवसेनयोः
tataḥ sutumulaḥ śabdo jalāntarjanamejayaprādurāsīdyathā pūrvaṃ kurupāṇḍavasenayoḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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