महाभारत 15.45.2
तमभ्यर्च्य महाबाहुः कुरुराजो युधिष्ठिरःआसीनं परिविश्वस्तं प्रोवाच वदतां वरः
tamabhyarcya mahābāhuḥ kururājo yudhiṣṭhiraḥāsīnaṃ pariviśvastaṃ provāca vadatāṃ varaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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